Sunday, 28 October 2018
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सत्य सिर्फ़ अंत है
सत्य सिर्फ़ अंत है सत्य सिर्फ़ अंत है, बाक़ी सब प्रपंच है, फैलता पाखण्ड है, बढ़ता घमण्ड है, किस बात का गुरुर है, तू किस नशे में चूर है समय से ...
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1.) अँधेरी रात को , उजाले की किरण दे दे मोहब्बत करने की एक तो वजह दे दे माना की झूट ही झूट फैला है हर तरफ न दे सको कुछ तो , इस सच को जहर ...
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गुनगुनाती ये बुँदे, कुछ स्वर कर गईं तुम वही हो, या खो गयी हो कहीं नाचती थी जो हाथ फैला, यही पे कहीं खिड़कियों से अब क्यों, ता...
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है अदा प्यारी अनोखी, छोटी सी ही इन दीयों की | है ये कोमल लौ जो भर दे, रोशनी अंधियार में || तन को मन को सींच जाती, खुशिओं से आनदं से | जब...

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